पूंछ जिले के मांडी से उठकर सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू के प्रशासनिक पद में पहुँचने तक डॉ. शाइस्ता गनई की यात्रा न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि कश्मीर के स्वास्थ्य क्षेत्र का परिदृश्य बदलने वाली भी साबित हुई है। राजनीतिक परिवार में जन्मीं शाइस्ता ने स्वास्थ्य सेवा को ही अपना माध्यम चुना और धीरे-धीरे एक मेडिकल छात्रा से अस्पताल के नेतृत्वकारी पद तक का लंबा सफर तय किया। इस कहानी में देखें कैसे उन्होंने अपनी मेहनत, समर्पण और दूरदर्शिता से मुकाम हासिल किया।
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शैक्षणिक नींव और शुरुआती संघर्ष
डॉ. शाइस्ता गनई का पालन-पोषण मांडी की दिव्य वादियों में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव लोगों की सेवा के प्रति था, लेकिन स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कदम रखने का निर्णय कॉलेज में MBBS की पढ़ाई शुरू करते समय लिया। 2012 में जम्मू विश्वविद्यालय से MBBS की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपना नाम चिकित्सा जगत में दर्ज कराया। पढ़ाई के दौरान उन्होंने शारीरिक परीक्षा के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता भी विकसित की, जो बाद में व्यावसायिक चुनौतियों से निपटने में काम आई।
अधिकारिक पंजीकरण और पहला अनुभ
डॉ. गनई ने 28 जनवरी 2013 को जम्मू-कश्मीर मेडिकल काउंसिल के समक्ष पंजीकरण की औपचारिकताएँ पूरी कीं। इस पंजीकरण ने उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवा में शामिल होने का पहला रास्ता दिखाया। चिकित्सा छात्रा से इंटर्नशिप और फिर सरकारी अस्पताल में जूनियर डॉक्टर की भूमिका में उनका पहला अनुभव कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों की सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करता है। तब उन्हें समझ आया कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन बचाने की जिम्मेदारी है।
व्यावसायिक विकास और मान्यता
चुनौतियों के बीच भी उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया। 4 मार्च 2014 को उनका नाम जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अधिनियमित चिकित्सा अधिकारियों में शामिल हुआ। उन्होंने ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों में स्वयंसेवा की, आपातकालीन कक्ष में गहन सेवाएँ प्रदान की और समय-समय पर चिकित्सा शिविर आयोजित कर गाँव-देहात के निवासियों को नि:शुल्क परामर्श व उपचार उपलब्ध कराया। इन पहलों ने उन्हें स्थानीय समुदाय में सम्मान दिलाया।
अकादमी ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में योगदान
चिकित्सा क्षेत्र में सिर्फ उपचार नहीं, बल्कि बेहतर प्रबंधन भी आवश्यक है, इस विश्वास के साथ डॉ. गनई ने 1987 में स्थापित ‘अकादमी ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन’ (एएचए) के जम्मू चैप्टर का हिस्सा बनने का निर्णय लिया। एएचए का उद्देश्य अस्पतालों में गुणवत्ता मानकों का सुदृढ़ीकरण और कर्मचारी प्रशिक्षण है। कार्यकारी सदस्य के रूप में उन्होंने अस्पताल प्रशासन के सर्वोत्तम प्रथाओं को विविध अस्पतालों में लागू कराने में मदद की, जिससे रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
जीएमसी जम्मू में नेतृत्व की राह
सितंबर 2024 में डॉ. शाइस्ता गनई को सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू में उप चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त किया गया। यह पद उन्हें उनके समर्पण और दक्षता का भुगतान था। इसमें मुख्य रूप से अस्पताल के विभिन्न विभागों का समन्वय, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, आपातकालीन सेवाओं का प्रबंधन, कर्मचारी शिकायतों का समाधान तथा बायोमेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन जैसे कार्य आते हैं। इन जिम्मेदारियों ने उनके प्रशासनिक कौशल को परखा और मजबूत किया।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए पहल
उप चिकित्सा अधीक्षक के रूप में डॉ. गनई ने कई बदलाव किए। उन्होंने मरीजों के वेटिंग टाइम कम करने के लिए प्रक्रियाएँ सुव्यवस्थित कीं, आधुनिक उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित की और रोगी सुरक्षा प्रोटोकॉल कड़ाई से लागू करवाए। साथ ही, उन्होंने डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम की शुरुआत की, जिससे मरीजों का डेटा सुरक्षित और त्वरित रूप से उपलब्ध होता है। इन पहलों से अस्पताल की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता दोनों में सुधार हुआ।
क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा पर प्रभाव
डॉ. गनई की सफलता का असर सिर्फ GMC जम्मू तक सीमित नहीं रहा। पूंछ जिले के ग्रामीण इलाकों में जहां स्वास्थ्य सुविधाएँ अभी भी सीमित हैं, वहां उनकी पहल ने स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाई। उन्होंने मोबाइल मेडिकल वैन चलाकर दूरदराज के गाँवों तक पहुँच बनाई और नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए। इससे स्थानीय लोगों में समय पर इलाज की अवधारणा मजबूत हुई और गंभीर बीमारियों के मामलों में कमी आई।
महिला नेतृत्व के प्रतीक
एक महिला के रूप में उच्च चिकित्सा पद तक पहुँचने को उन्होंने पारिवारिक समर्थन और व्यक्तिगत मेहनत से संभव बनाया। उनके उदाहरण ने जम्मू-कश्मीर में महिला डॉक्टरों को प्रेरित किया कि वे चिकित्सा और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। इससे यह सन्देश गया कि लिंग बाधाएँ कठिनाइयाँ पैदा कर सकती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति उन्हें पार कर लेती है।
भविष्य की योजना और दृष्टि
अभी डॉ. गनई की आँखें आगामी चुनौतियों पर टिकी हैं। वह अस्पताल के अधोसंरचना विकास, विशेषज्ञ विभागों के विस्तार और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलाइजेशन पर काम कर रही हैं। उनका लक्ष्य है कि GMC जम्मू सिर्फ एक इलाज केंद्र न रहे, बल्कि आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और सामुदायिक स्वास्थ्य का उदाहरण बने।
प्रेरणा और मिसाल
डॉ. शाइस्ता गनई की कहानी बताती है कि कैसे परिवार की विरासत आपके भीतर सेवा की भावना जगा सकती है, और शिक्षा आपको उस मिशन का वाहक बना सकती है। मांडी के पहाड़ों से निकलकर GMC जम्मू के प्रशासनिक पद पर पहुँचने तक का उनका सफर चिकित्सा क्षेत्र में दृढ़ता, नवीनता और करुणा का संगम है। आने वाली पीढ़ियाँ उनसे सीखेगी कि जब जुनून, तैयारी और नेतृत्व क्षमता मिल जाएं, तो कोई भी मुकाम कठिन नहीं रह जाता।
इस प्रकार, डॉ. गनई ने यह साबित किया है कि चिकित्सा केवल उपचार नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू में सुधार का माध्यम हो सकती है। उनकी यात्रा कश्मीर के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को नई दिशा दे रही है और भविष्य के चिकित्सा नेताओं के लिए एक प्रेरणा की मिसाल बन गई है।
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