शब-ए-बरात

शब-ए-बरात क्या है और इसे कैसे मनाया जाता है?

शब-ए-बरात इस्लाम की एक पाक और मुबारक रात मानी जाती है, जिसे दुआ, माफी और रहमत की रात कहा जाता है। मुसलमानों का विश्वास है कि इस रात अल्लाह गुनाहों को माफ करता है और इंसानों की तकदीर से जुड़े फैसले होते हैं। इस मौके पर लोग इबादत करते हैं, कुरान पढ़ते हैं, दान देते…

Read More
मस्जिदों के इमामों

मस्जिदों के इमामों की कम तनख्वाह के लिए जिम्मेदार कौन

मस्जिदों के इमामों को कम वेतन क्यों मिलता है, इस पर एक स्पष्ट और संतुलित विश्लेषण। इसमें उलेमा और समाज दोनों की भूमिका, व्यावहारिक समाधान और धार्मिक नेतृत्व के प्रति समाज की नैतिक जिम्मेदारी पर चर्चा की गई है। भूमिका मस्जिदों के इमामों की कम तनख्वाह केवल आर्थिक समस्या नहीं है। यह एक नैतिक, सामाजिक…

Read More
इमाम-ए-आज़म अबू हनीफ़ा

इमाम-ए-आज़म अबू हनीफ़ा और मस्लक-ए-हनफ़ी: हिकमत और एतदाल के साथ इस्लाम

इमाम-ए-आज़म अबू हनीफ़ा رضي الله عنه इस्लामी तारीख़ के सबसे अज़ीम उलमा में से एक हैं। दुनिया भर में करोड़ों मुसलमान अपनी रोज़मर्रा की दीनी ज़िंदगी में उनके बताए हुए उसूलों पर अमल करते हैं। वह सिर्फ़ बड़े आलिम ही नहीं थे, बल्कि आला अख़लाक़, गहरी सच्चाई और इंसाफ़ से मोहब्बत रखने वाले इंसान भी…

Read More
इस्लाम

इस्लाम का असली दुश्मन: अनपढ़ मुसलमान

यह लेख इस बात पर चर्चा करता है कि मुसलमानों में अज्ञानता कैसे इस्लाम को कमजोर कर सकती है, सही ज्ञान की क्या अहमियत है, और डिजिटल दौर में पारंपरिक शिक्षा की क्या भूमिका है। यह विश्लेषण इस्लामी शिक्षाओं पर आधारित है और आसान भाषा में उन वास्तविक समस्याओं को समझाता है जो तकनीक के…

Read More
शब-ए-मे’राज

शब-ए-मे’राज: पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ की मुक़द्दस यात्रा

इसरा और मे’राज, जिसे शब की यात्रा और आसमानों की सैर कहा जाता है, इस्लामी तारीख़ की सबसे अज़ीम और रूहानी वाक़ियात में से एक है। एक ही रात में अल्लाह तआला ने अपने महबूब रसूल, पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ को ऐसा मोज़िज़ा अता किया जो इंसानी समझ से बहुत ऊपर है। यह सफ़र मस्जिद-ए-हराम, मक्का…

Read More
रबीउल अव्वल

12 रबीउल अव्वल: रहमत और मोहब्बत का महीना

इस्लामी तक़रीबी साल का तीसरा महीना रबीउल अव्वल कहलाता है। यह महीना मुसलमानों के लिए बहुत बड़ी नेमत है क्योंकि इसी महीने में सरवर-ए-कायनात, रहमतुल-लिल-आलमीन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की विलादत हुई। यह महीना हमें मोहब्बत, रहमत, इंसाफ़ और इंसानियत के असूलों की याद दिलाता है। पैग़म्बर ﷺ की विलादत और तारीख़ी अहमियत रबीउल अव्वल…

Read More
निकाह हलाला

निकाह हलाला: समझने की ज़रूरत क्यों है?

“निकाह हलाला” दरअसल दो अरबी शब्दों से बना है – निकाह यानी विवाह और हलाला यानी किसी चीज़ को वैध या अनुमेय बनाना। यह प्रक्रिया तब सामने आती है जब कोई पुरुष अपनी पत्नी को तीन बार तलाक दे देता है। इस्लाम में तलाक के प्रकार इस्लाम में तलाक के तीन मुख्य रूप बताए गए…

Read More