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सबीरा हारिस: अलीगढ़ की बेटी ने एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप में दो स्वर्ण जीतकर भारत का नाम रोशन किया

सबीरा हारिस: अलीगढ़ की बेटी ने एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप में दो स्वर्ण जीतकर भारत का नाम किया रोशन

भारत ने खेलों के क्षेत्र में हमेशा नई ऊँचाइयाँ छुई हैं और अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छात्रा सबीरा हारिस ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। कज़ाख़स्तान में आयोजित 16वीं एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप में सबीरा ने दो स्वर्ण पदक जीतकर न केवल अपने परिवार और विश्वविद्यालय बल्कि पूरे देश को गर्व का अवसर दिया…

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रबीउल अव्वल

12 रबीउल अव्वल: रहमत और मोहब्बत का महीना

इस्लामी तक़रीबी साल का तीसरा महीना रबीउल अव्वल कहलाता है। यह महीना मुसलमानों के लिए बहुत बड़ी नेमत है क्योंकि इसी महीने में सरवर-ए-कायनात, रहमतुल-लिल-आलमीन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की विलादत हुई। यह महीना हमें मोहब्बत, रहमत, इंसाफ़ और इंसानियत के असूलों की याद दिलाता है। पैग़म्बर ﷺ की विलादत और तारीख़ी अहमियत रबीउल अव्वल…

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मुसलमानों में गरीबी और शिक्षा की कमी

मुसलमानों में गरीबी और शिक्षा की कमी: कारण, प्रभाव और समाधान

भारत की जनसंख्या का लगभग 14% हिस्सा मुसलमानों का है। इसके बावजूद शिक्षा, रोज़गार और आर्थिक स्थिति में यह समुदाय पिछड़ा हुआ दिखाई देता है। सरकारी आंकड़े और स्वतंत्र रिपोर्टें लगातार यह बताती रही हैं कि मुसलमान भारत के सबसे गरीब धार्मिक समुदायों में से एक हैं। इस गरीबी और शिक्षा की कमी ने उनके…

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जाकिर खान- भारतीय कॉमेडियन

ज़ाकिर खान: “सख़्त लौंडा” जिसने हँसी और सादगी से लाखों दिलों को जीत लिया

ज़ाकिर खान दो तरह के कॉमेडियनों में से वो हैं, जो सिर्फ़ हँसाते ही नहीं, बल्कि आपके ज़ख़्मों पर भी मुस्कान ले आते हैं और आपकी ही कहानी को मंच पर उतार देते हैं। लाखों लोगों के लिए वह सिर्फ़ “सख़्त लौंडा” नहीं हैं, बल्कि वो दोस्त हैं जो आपके क्रश से लेकर टूटे दिल…

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निकाह हलाला

निकाह हलाला: समझने की ज़रूरत क्यों है?

“निकाह हलाला” दरअसल दो अरबी शब्दों से बना है – निकाह यानी विवाह और हलाला यानी किसी चीज़ को वैध या अनुमेय बनाना। यह प्रक्रिया तब सामने आती है जब कोई पुरुष अपनी पत्नी को तीन बार तलाक दे देता है। इस्लाम में तलाक के प्रकार इस्लाम में तलाक के तीन मुख्य रूप बताए गए…

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2006 का मुंबई ट्रेन धमाका – मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट की खबर, तथ्य और न्यायिक फैसले

भारतीय मुसलमानों की बेगुनाही पर सवाल उठाना, संवैधानिक मूल्यों का अपमान है!

बेगुनाही पर सवाल, न्याय का अपमान है न्याय वह रोशनी है जो अंधेरी रातों में सच की राह को रोशन करती है, लेकिन जब राजनीति उस रोशनी पर कब्ज़ा कर ले, तो न्याय भी सवाल बन जाता है! यह वाक्य उन 12 मासूम मुसलमानों की ज़िंदगी पर बिल्कुल सही बैठता है, जिन्हें 2006 के मुंबई…

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